संघर्ष पर जीत की मिसाल बना नंदा सुनंदा प्रोजेक्टः दो होनहार बेटियों को एक-एक लाख की अतिरिक्त सहायता

होनहार बेटियों की संघर्ष कहानी सुनकर डीएम ने बढ़ाया सहायता का दायरा

by khabarchaumasa

जिले में बेटियों की शिक्षा को नई उड़ान देने वाला नंदा सुनंदा प्रोजेक्ट एक बार फिर संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बना। शुक्रवार को जिलाधिकारी सविन बंसल ने कठिन हालात से जूझ रही दो होनहार बालिकाओं की पढ़ाई जारी रखने के लिए न केवल एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी, बल्कि उन्हें लैपटॉप भी प्रदान कर उनके सपनों को मजबूती दी।

जिला प्रशासन द्वारा संचालित नंदा सुनंदा प्रोजेक्ट के माध्यम से गरीब, अनाथ और असहाय बालिकाओं की शिक्षा को निरंतर संबल दिया जा रहा है। अब तक इस पहल से 93 बालिकाओं को 33 लाख रुपये की सहायता देकर उनकी पढ़ाई को पुनर्जीवित किया जा चुका है। नंदा सुनंदा प्रोजेक्ट के 11वें संस्करण में 5 बालिकाओं को 1.50 लाख रुपये की सहायता दी जा रही थी तब दो बालिकाओं की असाधारण प्रतिभा और बेहद दयनीय पारिवारिक परिस्थितियों ने जिलाधिकारी को अतिरिक्त मदद के लिए प्रेरित किया।
इनमे ंसे एक बालिका जीविका अन्थवाल दून विश्वविद्यालय से बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। उनके पिता लीवर की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और वर्तमान में आईसीयू में भर्ती हैं। परिवार का खर्च किसी तरह उनकी माता उठा रही हैं। पहले ही नंदा सुनंदा प्रोजेक्ट के तहत 25 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई, लेकिन जीविका की मां की मार्मिक गुहार पर जिलाधिकारी ने आगे बढ़कर एक लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता और लैपटॉप प्रदान किया।
वहीं दूसरी बालिका नंदिनी राजपूत कक्षा 11 की छात्रा हैं, जिन्होंने 10वीं में 95 प्रतिशत अंक हासिल किए। पिता के निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी मां के कंधों   पर आ गई। आर्थिक तंगी के कारण नंदिनी का आगे पढ़ना मुश्किल हो रहा था। पहले 25 हजार की सहायता दी गई और उनकी प्रतिभा को देखते हुए डीएम ने नीट परीक्षा की तैयारी के लिए एक लाख रुपये की सहायता मंजूर की गई।
इस अवसर पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने दोनों बालिकाओं को चेक सौंपते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा “बालिकाओं के मन में शिक्षा के प्रति जो जुनून है, वह कभी कम नहीं होना चाहिए। परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अपने लक्ष्य को कभी मत छोड़िए।” मदद पाकर दोनों बालिकाओं और उनके अभिभावकों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने जिलाधिकारी और जिला प्रशासन की पूरी टीम का हृदय से आभार जताया।
 
इस अवसर पर उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार सहित बालिकाओं के अभिभावक व परिजन मौजूद थे।
 
जिला प्रशासान का नंदा सुनंदा प्रोजेक्ट आज सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि उन बेटियों के सपनों की डोर बन चुका है, जिन्हें हालात ने पीछे खींचने की कोशिश कीकृऔर प्रशासन ने आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया।

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